वो देश से गद्दारी कर मैच फिक्सिंग में नहीं फंसना चाहता। वो चाहता है कि क्रिकेट से भ्रष्टाचार खत्म हो जाए। वो अपने वतन के युवा खिलाड़ियों को फिक्सिंग की फांस से बचाना चाहता है। उसे खुद की जान से ज्यादा परिवार और देश के नाम की चिंता है। फिर भी पाकिस्तान सरकार ने उसे बीच मझधार में अकेला छोड़ दिया।
यहां बात हो रही है पाकिस्तान के युवा क्रिकेटर जुल्करनैन हैदर की। 24 साल के हैदर पिछले डेढ़ साल से सटोरियों से खुद को बचाने के प्रयासों में लगे हुए हैं। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में फिक्सिंग की पेशकश को ठुकराया तो उन्हें कप्तानी से हटा दिया गया। इसलिए शायद इस बार उन्होंने किसी प्रकार का खतरा ना मोल लेते हुए किसी को बिना बताए दुबई से लंदन जाना ठीक समझा।
साल 2007 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने वाले हैदर ने अपने पदार्पण टेस्ट मैच की आधी राशि पूर्व कप्तान इमरान खान के कैंसर हॉस्पिटल की ट्रस्ट में दे दी थी। यहीं पर हैदर की अम्मीजान की मृत्यु हुई थी। उस समय जुल्करनैन महज 12 साल के थे। वर्तमान में उनके पिता लीवर की बीमारी से अस्पताल में जूझ रहे हैं।
जुल्करनैन ने में अपने पहले और अबतक खेले एकमात्र टेस्ट में शानदार 88 रन की पारी खेली थी। लेकिन इसके बाद उन्हें मौका ही नहीं दिया गया। वनडे में तो उन्हें तीन साल तक परखा तक नहीं गया। हैदर ने साल 2007 में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच ट्वेंटी-20 खेला था। जुल्करनैन ने इसके बाद से तीन टी 20, चार वनडे और एक टेस्ट मैच खेले हैं। हैदर ने चारों वनडे हाल ही में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेले थे।
दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध चौथे वनडे में हैदर ने सटोरियों का आग्रह ठुकराते हुए पाकिस्तान के लिए मैच जिताऊ प्रदर्शन किया था। इसके तुरंत बाद उन्हें धमकियां मिलने लगी जिससे तंग आकर हैदर किसी को बिना सूचित किए दुबई से लंदन के लिए रवाना हो गए।
जुल्करनैन मोहम्मद आमिर, सलमान बट्ट और मोहम्मद आसिफ जैसे गद्दार खिलाड़ियों के बीच एक मासूम फूल से नजर आते हैं। ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी खिलाड़ी ने सटोरियों को इंकार कर सार्वजनिक रूप से उनके खिलाफ मोर्चा खोला है। हालांकि उनका तरीका थोड़ा गलत था। जुल्करनैन यदि सीधे आईसीसी के पास पहुंच जाते तो शायद उनकी छवि और बेहतर होती।
लेकिन हैदर द्वारा गलत तरीके से उठाया गया ये एक सही कदम है जिसका समर्थन पूरे क्रिकेट जगत को करना चाहिए। ये एकदम सही मौका है जब क्रिकेट की गंदगी को साफ किया जा सकता है। हालांकि सलमान बट्ट, आसिफ और आमिर को निलंबित कर आईसीसी ने थोड़ा भ्रष्टाचार कम किया है, पर फफूंद बहुत गहरी है और इसका साफ होना जरूरी।
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