भारत में खेलों की स्थिति कैसी है इस बात से हर कोई वाकिफ है। आज परिस्थितियां कुछ ऐसी हो गई हैं कि हर खिलाड़ी क्रिकेट के अलावा कोई भी और खेल में करियर बनाने के बारे में हज़ार बार सोचता है। इसकी वजह क्या है? क्या हमारे देश का प्रशासन इतना कमज़ोर है, इसका जीवित उदाहरण हैं सान्थी सौंदराजन।
शायद आपको नाम याद नहीं आरहा होगा। उसेन बोल्ट की रफतार से तो बच्चा-बच्चा वाकिफ होगा पर भारत को एशियाई खेलों में रजत पदक से गौरवांवित करने वाली सान्थी सौंदराजन को कम ही लोग जानते हैं। सान्थी ने अपने वतन का गौरव बढ़ाने के लिए अपनी गरीबी से लड़कर एशियाई खेलों में पदक हासिल किया पर उनको इसका सिला अपमान के रूप में मिला।
गौरतलब है कि सान्थी का पदक उन पर द्विलिंगी होने के आरोपों के बाद छीन लिया गया था। इन आरोपों के बाद सान्थी का जीना दूभर होगया। उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पर उनकी मदद के लिए कोई सामने नहीं आया, ना जनता ना प्रशासन।
सभी इल्ज़ामो से तंग हो चुकी सान्थी ने सितंबर 2009 में आत्महत्या करने का प्रयास किया था। पर खुशकिस्मती से वो बच गईं, शायद और अपमान झेलने के लिए। अगर वो किसी और मुल्क के लिए दौड़ी होतीं तो उन्हें ऐसी मानसिक प्रताड़ना नहीं सहनी पड़ती।
ऐसे ही एक और प्रकरण पर नज़र डालें तो दूसरे देशों में हालात विपरीत दिखाई देते हैं। दक्षिण अफ्रीका की धावक केस्टर सिमेन्या का विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण पदक द्विलिंगी होने का आरोपों के बाद छीन लिया गया था। उनके द्विलिंगी होने की खबर के मीडिया में लीक होते ही दक्षिण अफ्रीका की सरकार ने सिमेन्या की गोपनीय बात के आम होने से नाराज़ होकर तीसरे विश्व युद्ध की घोषणा कर दी थी।
यही नही सिमेन्या ने भी अंतरराष्ट्रीय असोसिएशन ऑफ एथलेटिक्स फेडरेशन्स को रिपोर्ट लीक होने के बाद उसे कोर्ट में घसीटने की धमकी दी थी। पर ऐसा करने का माद्दा भारत की सरकार नहीं दिखा सकती है। हमारे यहां तो सारा दोष खिलाड़ियों पर मढ़कर उन्हे भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है।
भारतीय क्रिकेटरों पर जब जब कोई आंच आई है क्रिकेट बोर्ड ने हर बार उनका बचाव किया है, फिर वो चाहे सौरव गांगुली पर बैन लगाने का मामला हो या राहुल द्रविड़ पर गेंद से छेड़छाड़ का केस।
पर अन्य खेलों में ना संघ सामने आता है ना सरकार। ऐसे में मेहनती खिलाड़ी क्या करें, सरकार के जागने का इंतज़ार या ईश्वर से दुआ। सान्थी प्रकरण के बाद हर खिलाड़ी आज यही सोच रहा है- काश मैंनें क्रिकेट को चुना होता।
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