Saturday, March 19, 2011

विस्फोटक टेलर की गिल्लियां बिखेर चुका है विदर्भ का छोरा

नागपुर. आपने ब्रेट ली और शोएब अख्तर को स्टंप को चीर देने वाली गेंदबाजी रफ्तार से गेंदबाजी करते हुए तो देखा होगा, लेकिन विदर्भ के छोटे कस्बों में भी ऐसी प्रतिभाएं पल रही हैं जो कि दिग्गज बल्लेबाजों के छक्के छुड़ा सकती हैं। कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और सचिन तेंडुलकर को बल्लेबाजी का अभ्यास करवा रहे विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन के चार गेंदबाजों से बात की दैनिक भास्कर डॉट कॉम ने।


वर्ल्डकप के दौरान टीमों को नेट में अभ्यास करवाने के लिए विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन ने 36 खिलाड़ियों को नियुक्त कर रखा है। इनमें से 20 नागपुर के हैं और शेष 16 आस पास के देहाती इलाकों से आए हुए हैं। आइए एक नजर डालते हैं इनके एक छोटे से परिचय पर-


आनंद सिंह


उम्र 22 साल


निवासी माजरी गांव चंद्रपुर जिला


खूबी ऑफ स्पिनर


छोटी सी उम्र में आनंद के हौसले बुलंद हैं। उन्होंने सोच रखा हैं कि देश का नंबर वन ऑफ स्पिनर बनकर ही दम लेना है। विदर्भ के लिए रणजी खेलने के प्रयासों में जुटे आनंद हरभजन सिं को अपना आदर्श मानते हैं। क्रिकेट में करियर बनाने की ठाने हुए आनंद अभी बीबीए कर रहे हैं।


रामेश्वर सोनुने


उम्र 20 साल


निवासी चिखली गांव जिला बुलढाना


रामेश्वर, जैसा नाम वैसा ही काम है इस बाएं हाथ के मध्यम तेज गेंदबाज का। इनकी खूबी ये है कि 20 साल की छोटी सी उम्र में ये न्यूजीलैंड के बल्लेबाज रोस टेलर, जिनको काबू करने में पाकिस्तान के सबसे तेज गेंदबाज शोएब अख्तर बुरी तरह से नाकाम रहे थे, उनको नेट प्रैक्टिस के दौरान दो बार क्लीन बोल्ड कर चुके हैं। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मुकाबले से पहले रामेश्वर ने कप्तान धोनी और हरभजन को भी अपने बाउंसरों का स्वाद चखाया है।


चरन सिंह बोराडे


उम्र 23 साल


निवासी खामगांव बुलढाणा जिला


दिखने में बैंड बाजा बारात मूवी के रनबीर सिंह लगने वाले चरन सिंह को युवा जहीर खान कहा जाए तो गलत नहीं होगा। चरन 150 किमी की रफ्तार से गेंद डाल लेते हैं। अपनी शानदार गेंदबाजी से वो इंग्लैंड के इयान बेल को लगभग घायल कर चुके हैं। चरन की गेंद खेलने के बाद बेल आगे का अभ्यास नहीं कर पाए थे। उनकी गेंदबाजी देखने के बाद इंग्लैंड के कोच एंडी फ्लावर ने उनसे पूछा था, क्या तुम टीम इंडिया के लिए खेल चुके हो, या आईपीएल में खेलते हो। बहुत बढ़िया गेंद डालते हो। इतना ही नहीं, न्यूजीलैंड के कोच जॉन राइट ने चरन की गेंदबाजी से खुश होकर उन्हें एक गेंद भी उपहार में दी थी।


सुनील राथौड़


उम्र 22 साल


निवासी चिखली गांव बुलढाणा जिला


सीधे हाथ के मध्यम तेज गेंदबाज टीम इंडिया के मुनाफ पटेल से लगते हैं। इनकी कहानी भी कुछ ऐसी ही है। अपनी गेंदबाजी से ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग की वाहवाही लूटने वाले सुनील की माली हालत कुछ खास नहीं है। वो इस समय बीफार्मा कर रहे हैं। अपने बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, हमारे घर की मासिक आमदनी महज 3000 रुपए है। इसमें से आधे से ज्यादा तो मेरी पढ़ाई पर खर्च हो जाता है। क्रिकेट एक महंगा खेल है लेकिन मैं इसे छोड़ना नही चाहता। मेरी ख्वाहिश है कि मैं एक दिन टीम इंडिया का हिस्सा बनूं।


कोच को है विश्वास चमकेंगे ये चार सितारे


इन चारों जोशीले खिलाड़ियों के कोच रहीम पठान को भरोसा है कि ये लड़के एक दिन बड़ा नाम कमाएंगे। कोच पठान का कहना है कि वो इन्हें टीम इंडिया के भविष्य के रूप में देखते हैं। पिछले कुछ समय से बीसीसीआई ने अपनी चयन की तीनि में परिवर्तन किया है। अब वो दूर देहात में पनप रही प्रतिभा को मौका देना चाहते हैं। ऐसे में इन चारों के अवसर बढ़ जाएंगे।


क्या हैं संभावनाएं


क्रिकेट एक कठिन खेल है। इसमें नेशनल टीम का हिस्सा बन पाना बहुत कठिन है। लेकिन इन चारों को विश्वास है कि उनका ये ख्वाब जरूर पूरा होगा। इन चार में से चरन सिंह और रामेश्वर को विदर्भ के रणजी टीम कोच विलक्ष्ण कुलकर्णी ने भरोसा जताया है कि इन दोनों को संभावित खिलाड़ियों में रखा गया है। सचिन तेंडुलकर को अपना दिल मानने वाले ये चार स्टार अपने मन में कभी नकारात्मक भाव को नहीं आने देते। ये मेहनत कर रहे हैं और हम दुआ करते हैं कि ये जरूर सफल हों।

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