Thursday, March 17, 2011

सचिन हैं कमाल के, कुछ सीखो इनसे

मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर को दिग्गज क्रिकेट की यूनिवर्सिटी कहने लगे हैं, लेकिन शायद उनके समकालीन खिलाड़ियों को इस बात का ऐहसास नहीं होता। वर्ल्डकप में दो शतक लगाकर सचिन ने ये दिखा दिया है की सिर्फ ताबड़तोड़ बल्लेबाजी से ही बड़े स्कोर नहीं बनाए जाते, बल्कि स्थिति को समझकर धीरे-धीरे पारी को जमाया जाता है।


इस वर्ल्डकप में बड़ा स्कोर बनाने का फंडा है ओपनिंग बल्लेबाजों का अच्छा प्रदर्शन। लेकिन अधिकतर टीमों के सलामी बल्लेबाजी पॉवरप्ले में ताकत दिखाने के फेर में सस्ते में आउट हो रहे हैं। फिर चाहे वो पाकिस्तान हो या भारत सभी का एक सा हाल है।


क्या किया सचिन ने


सचिन ने वर्ल्डकप में अबतक दो शतक लगाए हैं। ये शतक भी इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसी दिग्गज टीमों के विरुद्ध आए हैं। सचिन ने चौके से आगाज करने के बजाए कमजोर गेंदों का इंतजार किया और उसके बाद धीमे-धीमे अपनी पारी को बनाया।


इंग्लैंड के खिलाफ लगाए सैकड़े का उदाहरण लें तो सहवाग और तेंडुलकर की बल्लेबाजी में अंतर साफ नजर आ रहा था। जहां एक ओर वीरेंद्र सहवाग ने पहली ही गेंद से आक्रामक रुख अपनाते हुए चौका लगाया और जल्दी-जल्दी रन बनाने के चक्कर में 35 रन बनाकर आउट हो गए। सहवाग अच्छी शुरुआत करने के बाद उसे बड़े स्कोर में तब्दील नहीं कर सके।


वहीं दूसरी ओर पिच को भांपते हुए सचिन ने एक और दो रन लेने से शुरुआत की। कमजोर गेंद देखकर उस पर चौके भी लगाए। लेकिन वो कभी भी किसी हड़बड़ी में नहीं दिखे। तेंडुलकर ने अपना रौद्र रूप मैच के 29वें ओवर में दिखाना शुरु किया। इस ओवर में सचिन ने लगातार गेंदों पर दो चौके जमाए। सचिन ने पहला छक्का 36वें ओवर की चौथी गेंद पर लगाया।


तेंडुलकर ने इंग्लैंड के खिलाफ शतक के लिए लगभग तीन घंटे क्रीज पर बिताए। नागपुर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच में भी सचिन ने तीन घंटे से भी अधिक का समय बिताया। सचिन ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शतक में तीन छक्के और आठ चौके लगाए।


इस वर्ल्डकप में अबतक हुए 35 ग्रुप मुकाबलों में पहले विकेट के लिए कुल आठ शतकीय पार्टनरशिप हुई हैं। इसमें से भी श्रीलंका के उपुल थरंगा और तिलकरत्ने दिलशान ने 250 रन से अधिक रन जोड़े थे। और ऑस्ट्रेलिया की सलामी जोड़ी एक मात्र ऐसी जोड़ी है जिसने अबतक दो बार 100 रन से ज्यादा की पार्टनरशिप की है।


इस वर्ल्डकप की शतकीय ओपनिंग साझेदारी इस प्रकार से हैं-


एंड्रयू स्ट्रास और पीटरसन - इंग्लैंडवाटसन और हैडिन - ऑस्ट्रेलियास्मिथ और गेल - विंडीजगुप्टिल और मैक्कुलम - न्यूजीलैंडउपुल थरंगा और दिलशान - श्रीलंकाब्रेंडन टेलर और चकबावा - जिम्बाब्वेसहवाग और तेंडुलकर - भारतवाटसन और हैडिन - ऑस्ट्रेलिया


ऑस्ट्रेलिया ने समझा फंडा


अब तक सलामी बल्लेबाजी में सबसे अच्छा प्रदर्शन ऑस्ट्रेलियाई टीम का रहा है। इस टीम के ओपनर शेन वाटसन और ब्रेड हैडिन ने टूर्नामेंट में दो बार 100 रन से ज्यादा जोड़ चुके हैं। पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ और उसके बाद कना़डा के विरुद्ध दोनों ने शतकीय साझेदारी निभाई।


जिम्बाब्वे के विरुद्ध अहमदाबाद में हुए मुकाबले में दोनों बल्लेबाजों ने पिच को समझते हुए धीमी बल्लेबाजी की और 10-12 ओवर होने के बाद गेंदबाजों पर हमला बोलना शुरु किया था।

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