Saturday, March 19, 2011

गाली-गलौंज ने क्रिकेट को हराया

खेल के मैदान पर खिलाड़ी अपनी सफलता पर बहुत उत्साहित हो जाते हैं। इस जोश में वो विपक्षी खिलाड़ी के साथ गाली-गलौंज करने से भी नहीं चूकते। खिलाड़ियों के बीच मैदान पर होती तूतू-मैंमैं से दर्शकों को भी बड़ा आनंद आता है, लेकिन कहीं ना कहीं इससे एक महत्वपूर्ण चीज आहत हो जाती है - खेल भावना।


इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच प्रतिष्ठित एशेज सीरीज में कई ऐसे किस्से सामने आए। ब्रिसबेन टेस्ट में मिली हार से बौखलाए मेजबान ने स्लेजिंग को अपना हथियार बनाकर तीसरा मुकाबला 267 रन से जीत लिया। छींटाकशी सिर्फ कंगारुओं की तरफ से नहीं बल्कि इंग्लैंड के सभ्य खिलाड़ियों की ओर से भी होती रही।


इंग्लैंड के गेंदबाज जेम्स एंडरसन ने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज मिशेल जॉनसन पर लगातार टीका-टिप्पणियां की। इसका जवाब जॉनसन ने पहले अपने बल्ले और उसके बाद अपनी कहर बरपाती गेंदों से दिया। जॉनसन को सिर्फ विकेट लेकर ही चैन नहीं मिला, बल्कि उन्होंने अपने शब्दों के बाण से भी अंग्रेजी बल्लेबाजों को घायल किया।


इस मैच से ये सवाल उठता है कि क्या भद्रजनों का खेल कहे जाने वाले क्रिकेट में इस प्रकार की छींटाकशी कितनी सही है।


पुराना है फार्मुला


ये पहली बार नहीं है जब ऑस्ट्रेलिया ने विपक्षी खिलाड़ियों का मनोबल गिराने के लिए जुबानी रणनीति का सहारा लिया है। हाल ही में भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज में भी कंगारुओं की भिड़ंत गेंदबाज जहीर खान से हुई थी। गौतम गंभीर और ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी शेन वाटसन के बीच भी जुबानी जंग हो चुकी है।


यही रणनीति इंग्लैंड के खिलाड़ियों के मास्टर प्लान में भी शामिल रहती है। भारत के इंग्लैंड दौरे के दौरान स्लिप में खड़े केविन पीटरसन ने जहीर खान की ओर जैली बीन फेंककर उनका ध्यान बटाने की कोशिश की थी। ये किस्सा बहुत मशहूर हुआ था। नतीजा ये था कि जहीर सीरीज के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज के रूप में उभरे थे।


क्या कहना है जनता का


क्रिकेट में स्लेजिंग पर खेल प्रेमियों के अलग-अलग विचार हैं। कुछ का मानना है कि ये खेल का हिस्सा है और सबको इसे स्वीकार करना चाहिए। जबकि कुछ का कहना है कि टिप्पणी कर विपक्षी खिलाड़ी का ध्यान बंटाना खेल भावना के खिलाफ है। यदि आपको जीतना है तो अच्छा खेल दिखाना होगा, गाली-गलौंज इसका विकल्प नहीं हो सकता।


सचिन से सीखो


एशेज सीरीज में खिलाड़ियों की छींटाकशी पर गुस्साए लोगों ने क्रिकेटरों को मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर से सीख लेने की हिदायत दी है। क्रिकेटप्रेमियों का मानना है कि सचिन कभी इस प्रकार के विवाद में शरीक नहीं हुए, और इसलिए वो एक महान खिलाड़ी हैं। चाहे मैदान और या उसके बाहर, तेंडुलकर की शालीनता सबका दिल जीत लेती है।


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